द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : जल्द बनेगा ‘आशिकी 2′ का सीक्वल

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बॉलीवुड में फिल्मों के सीक्वल लगातार आ रहे है और इस को लोग काफी पंसद भी कर रहे है। फिल्मों के सीक्वल के अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए फिल्म निर्माता भूषण कुमार फिल्म ‘आशिकी’ का सीक्वल बना रहे है। उन्होंने कहा कि वह फिल्म ‘आशिकी’ का तीसरी और चौथी सीक्वल भी बना सकते है।

सूत्रों के अनुसार मोहित सूरी द्वारा निर्देशित रोमांटिक फिल्म ‘आशिकी’ का सीक्वल ‘आशिकी 2′ हिट हुई है। भूषण कुमार ने कहा कि प्रेम कहानियों का कभी अंत नहीं होता है और हम इन फिल्मों को एक ब्रांड की तरह बना दर्शकों के पास तब तक तक ले जाएंगे जब तक वे इसे देखना पसंद करेंगे।

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द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : ब्रिटेन में भी दौड़ेगी शाहरुख की चेन्नई एक्सप्रेस

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बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान की फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस ब्रिटेन में भी बहुत बड़े पैमाने पर प्रदर्शित होने जा रही है। अपनी आने वाली फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस के प्रमोशन के सिलसिले में लंदन पहुंचे शाहरुख खान ने कहा कि बिट्रेन के लोग लाजवाब हैं। इतने बडे़ पैमाने पर फिल्म का रिलीज होना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं उम्मीद करता हूं कि यहां के दर्शकों को मेरी फिल्म पसंद आएगी।

 

 

बताया जाता है कि ब्रिटेन में चेन्नई एक्सप्रेस 125 सिनेमाघरों में और 170 स्क्रींस पर रिलीज होने जा रही है। इसके पहले बॉलीवुड की कोई भी फिल्म ब्रिटेन में इतने बड़े पैमाने पर रिलीज नहीं हुई है।

 

गौरतलब है कि रोहित शेट्टी के निर्देशन में बन रही चेन्नई एक्सप्रेस का निर्माण शाहरुख की कंपनी रेड चिलीज के द्वारा किया गया है। चेन्नई एक्सप्रेस में शाहरुख के अलावा दीपिका पादुकोण की भी मुख्य भूमिका है। चेन्नई एक्सप्रेस ईद के अवसर पर 09 अगस्त को प्रदर्शित होगी।

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द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : फॉरेस्ट्री से बनेगा कॅरियर

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फॉरेस्ट्री के तहत पेड़ों की देखरेख आदि का काम होता है। इसके अंतर्गत ट्री-फॉर्मिग जैसी कोर्सेज भी शामिल होती हैं। अगर आपने इंटरमीडिएट साइंस से किया है, तो आप आगे बीएससी इन फॉरेस्ट्री की राह चुन सकते हैं। आज इस फील्ड में काफी अवसर उपलब्ध हैं। मास्टर लेवल पर इसका फॉरेस्ट मैनेजमेंट, फॉरेस्ट इकोनॉमी, वुड साइंस टेक्नोलॉजी, फॉरेस्ट मैनेजमेंट जैसे विषयों में पढ़ाई होती है। आज इससे जुड़े ऎसे कई कोर्स हैं, जिसे करके आप अपने कॅरियर को उज्जवल बना सकते हैं।

1.इनवायरनमेंट मैनेजमेंट
यह फील्ड वैसे विद्यार्थी के लिए है, जो पर्यावरण से जुड़ी अलग-अलग संस्थाओं के प्रोजेक्ट्स को प्रबंधक के तौर पर पूरा करने की चाहत रखते हैं। इन सारे कोर्सेज के तहत छात्रों को इनवायरनमेंटल मैनेजमेंट के सिद्धांत, पर्यावरण पर प्रभाव, पर्यावरण कानून आदि पढ़ाया जाते हैं।

2.प्लांट पैथोलॉजी
प्लांट पैथोलॉजी के अंतर्गत पौधों को बीमारियों से बचाने का काम होता है। पौधों को हानिकारक पेस्टीसाइड्स के इस्तेमाल से पैदा हुई परेशानियों और बैक्टीरिया और फंगस आदि से निपटाने का काम होता है। इस क्षेत्र में बीएससी डिग्री का कोर्स पॉपुलर हैं। 

3.बायोटेक्नोलॉजी
यह रिसर्च पर आधारित कोर्स है। इसमें फसल, मानव स्वास्थ्य, दवा निर्माण, रिसर्च, पशु प्रजनन, खाद्य पदार्थो का निर्माण, संरक्षण जैसी चीजें आती हैं। इसके लिए आपको बीएससी बायोटेक्नोलॉजी का कोर्स करना होगा। कोर्स में एडमिशन के लिए साइंस ग्रुप से बारहवीं होना जरूरी है।

4.एक्वा साइंस
एक्वाकल्चर के अंतर्गत सागर, नदियों और ताजे जल के कंजरवेशन, उनके पारिस्थितिकी की सुरक्षा से संबंधित पढ़ाई की जाती है। इन दिनों घटते जल स्त्रोतों और पेयजल संसाधनों के कम होने के कारण इस फील्ड में विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है।

5.इनवायरनमेंट लॉ
इसमें इनवायरनमेंटल पॉलिसीज, उनके इफेक्ट्स और इम्प्लीमेंटेशन के बारे में पढ़ाया जाता है। यह क्षेत्र उन विद्यार्थियों के लिए हैं, जो इनवायरनमेंटल पॉलिसीज से संबंधित कानून के जरिए अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।

6.कोर्स की जानकारी
फॉरेस्ट्री के अंतर्गत वन, संबंधित उत्पाद और वन्य जीवों आदि का अध्ययन किया जाता है। वनों में पौधरोपण, क्षेत्र विशेष के वृक्षों की उपयुक्त प्रजातियों का विकास, उनका वनीकरण पैटर्न तैयार करना, वन्य जीव संरक्षण, उनकी गतिविधियों व उपचार का अध्ययन, पारिस्थितिकी संतुलन में वनों की भूमिका जैसे विषय इसका प्रमुख अंग है।

7.रोजगार के अवसर
फॉरेस्ट्री में बीएएसी, एमएससी और पीएचडी डिग्री करने वालों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं है। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा प्रतिवर्ष इंडियन फॉरेस्ट सर्विस का आयोजन किया जाता है। इसके माध्यम से भारतीय वन सेवा क्षेत्र में फॉरेस्ट ऑफिसर के रूप में कॅरियर की शुरूआत की जा सकती है। वन्य जीवों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न एनजीओ भी फारेस्ट्री विशेषज्ञों की मांग करते हैं। यह क्षेत्र प्रकृति से जुड़ने और रोजगार की दृष्टि से काफी अच्छा है। आप इस फील्ड में प्रवेश लेकर अपने सपने को पूरा कर सकते हैं और अपने कॅरियर को चमका सकते हैं।

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द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : सिगरेटनुमा कार जो चलती है धडल्ले से सडकों पर

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आपने कभी सिगरेट जैसी कार को चलाया है, चालाने की तो बात छोडीये आपने तो शायद ऎसी कार कभी देखी भी नहीं होगी । आइये हम बाताते है आपकों ऎसी ही एक कार के बारे में। 

इस विशुद्ध भारतीय कार की खूबी यह है कि यह कार जैसी तो बिल्कुल भी नहीं दिखती। यह बनाई कुछ इस तरह गई है कि शायद आप इसे खाने-पीने, इस पर सोने, पढाई करने के लिए उपयोग करना या इससे क्रिकेट या फुटबॉल खेलना चाहें। इस कार के लिए कोई निश्चित आकार, रंग या बैठने की सीट नहीं है। आप जैसा चाहेंगे यह कार वैसी ही दिखती है।

आपको बर्गर बहुत पसंद है, इस कार को बर्गर बनाकर रख सकते हैं। चाय के दीवाने हैं, यह कार चाय की प्याली बन जाएगी। क्रिकेट बहुत पसंद है, आप इसे बैट-बॉल बनाकर रख सकते हैं। आपको फुटबॉल बहुत पसंद है, इसे फुटबॉल के आकार में सडकों पर चला सकते हैं। सिगरेट बहुत पीते हैं, इस सिगरेटनुमा कार को आप धडल्ले से सडकों पर चला सकते हैं। आप थकते बहुत ज्यादा हैं पर सफर में अपना आरामदायक दीवान बेड तो लेकर चल नहीं सकते, इसलिए यह कार आपके दीवान बेड की तरह ही दिखती और उतनी ही आरामदायक है। इसे चाहें तो अपने सोने के कमरे में डबल बेड के रूप में सजाएं या आधी रात में इसे चलाकर सडकों पर निकल जाएं।

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द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : पांचवीं की किताब ने CM को बना दिया ‘चोर’

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क्या कभी आपने सुना है कि किसी किताब ने किसी मुख्यमंत्री को चोर बनाया हो। अगर नहीं सुना तो हम आपको इसके बारे में बताते है। दरअसल सिक्किम के मुख्यमंत्री को पांचवीं की अंग्रेजी की एक किताब में चीफ की जगह थीफ बताया गया है। हालांकि किताब में यह गलती से हुआ है। किताब में कुछ और गलतियां भी है।

किताब को दिल्ली के पब्लिकेशन ने छापा है। इस मामले में चार लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है। इस गलती को सुधारने के लिए टीचरों को बोल दिया गया है।

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द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : B’day Special: बिकनी से लेकर बी ग्रेड फिल्मों तक छा गई थी मुमताज

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आज जानी-मानी एक्ट्रेस मुमताज का जन्मदिन है। 1947 में जन्मी मुमताज बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई है। 60 और 70 के दशक में मुमताज की फिल्मों की भरमार थी। 1961-63 तक इन्होंने एक एक्स्ट्रा जूनियर आर्टिस्ट की तरह करियर की शुरूआत की।

शुरुआती दौर में जब किस्मत ने साथ नहीं दिया तो वह लो बजट की फिल्मों के अलावा बी ग्रेड की फिल्मों में भी नजर आई थीं।  1965 मुमताज की फिल्म ऐ मेरे सनम में एक वैंप की भूमिका निभाई थी, जिसे काफी सराहाना मिली।  बी ग्रेड की हिरोइन और एक्स्ट्रा रोल निभाने वाली एक्ट्रेस के रूप में विख्यात मुमताज को अब ए ग्रेड की फिल्में मिलने लगी थीं।

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द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : …तो बच्चा आपकी हर बात मानेगा

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बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने में मां-बाप की भूमिका काफी अहम होती है। अगर माता-पिता संस्कारी होंगे, तभी तो बच्चे भी संस्कारी बनेंगे। आजकल के माहौल में बच्चों को अच्छे संस्कार दे पाना माता-पिता के लिए मुश्किल होता जा रहा है। माता-पिता कितना भी समझा लें बच्चे वही करते हैं, जो उनका मन कहता है लेकिन अगर शुरू से ही आप अपने बच्चों को समझें और उनका मार्गदर्शन करें, तो आपका बच्चा जरूर आपकी बात मानेगा।

संस्कार की जड़ें बचपन से जुड़ीं

बच्चे जो भी व्यवहार करते हैं उसकी जड़ें बचपन से जुड़ी होती हैं। बच्चों का दिमाग वह कोरी स्लेट होता है जिस पर हम जो चाहें लिख सकते हैं। यह प्रक्रिया जन्म से लेकर चार-छ: वर्षों तक चलती रहती है। इस उम्र में माता-पिता को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आपको उन्हें संस्कारी बनाना हो तो आपको अपने फर्ज से नहीं चूकना चाहिए।

बच्चों को संस्कार उपदेश देकर नहीं सिखाए जा सकते। बच्चे वही सीखते हैं, जो माता-पिता को करते देखते हैं। उन्हें स्वयं के व्यवहार में वे बातें अपनानी होंगी जो बच्चों के हित में हों। जैसे आपके गुण होंगे, बच्चे वैसा ही सीखेंगे। जो आप करते होंगे वैसा ही वे करेंगे। वे सोचेंगे कि हम अपने पेरैंट्स से भी बढ़ कर करें।

हर बच्चा यूनीक होता है

हर किसी का पेरैंटिंग स्टाइल अलग होता है। इसे एक निश्चित फॉर्मूले में बांध कर नहीं रखा जा सकता। सभी बच्चे भी एक समान नहीं होते। उनकी सारी आदतें एक-दूसरे से अलग होती हैं। कोई ज्यादा शरारती होता है, तो कोई थोड़ा। ऐसे में उन्हें अपने माहौल में ढालने के लिए थोड़ी मेहनत तो आपको करनी ही पड़ेगी। सबसे ज्यादा परेशानी उन महिलाओं के साथ है, जो वर्किंग हैं। प्रोफैशनल लाइफ के साथ-साथ उनके लिए अपने बच्चों हेतु भी समय निकालना जरूरी होता है। आप क्वालिटी टाइम देकर उन्हें सही मार्गदर्शन दे सकती हैं।

व्यावहारिक बातें भी हैं जरूरी
बच्चे में अच्छे संस्कार विकसित करना चाहती हैं, तो व्यावहारिक बातें समझाना भी बेहद जरूरी है। उसे बचपन से ही सिखाएं कि बड़ों से कैसे बात की जाए। बड़ों का अभिवादन करना, थैंक्यू और सॉरी कहना जरूर सिखाएं। हाइजीन मेनटेन करना, पार्टी एटीकेट्स, रैस्टोंरैंट मैनर्स इन सब चीजों को स्वयं तो फॉलो करें ही, बच्चों को भी सिखाएं। कुछ चीजें तो वह आप से देख कर ही सीख सकता है। इसलिए आप भी अपने व्यवहार में थोड़ा बदलाव लाएं और उनकी रोल मॉडल बनें।

बातचीत से जीतें विश्वास
बच्चों के नजदीक रहने और उनके मन की बात को जानने का सबसे सरल तरीका है उनसे बातचीत करना। आप बच्चों से बात करके उनका विश्वास जीत सकती हैं। बातचीत के जरिए ही आप बच्चे से सबकुछ शेयर कर सकती हैं। इस तरह वे अपने मन की बात आपसे कहने से नहीं डरेंगे। वे अपनी हर बात आपसे शेयर करेंगे। बच्चों पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण भी न रखें। उन्हें भी थोड़ा स्पेस दें और उन्हें कभी-कभी अपने मन की करने दें। कई बार पेरैंट्स बच्चों के साथ जरूरत से ज्यादा सख्ती बरतते हैं। ऐसे में बच्चे डर के चलते झूठ का सहारा लेने लगते हैं इसलिए ऐसा माहौल कभी न बनाएं।

पढ़ाई को हौव्वा न बनाएं
अक्सर देखने में आता है कि पेरैंट्स बच्चों पर पढ़ाई को लेकर बहुत दबाव बनाते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। हर दिन थोड़ा-थोड़ा अच्छी तरह से पढ़ाएं और समय-समय पर खुद रिवीजन करवाएं, तो बच्चों पर दबाव नहीं बनेगा। जिस सब्जैक्ट में वह कमजोर है वहां आप उसके साथ एक्सट्रा मेहनत करें। अगर ट्यूटर की जरूरत है, तो उसका भी अरेंजमैंट करें। मगर सब कुछ उसी के ऊपर न छोड़ें। खुद भी वीकैंड में उसकी पढ़ाई में मदद करें।
  
डाइट भी हो राइट
ग्रोइंग बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट की जरूरत होती है। जो भी उसे खाने के लिए दें, उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू जरूर देखें। मिल्क या प्रोटीन से भरपूर सोया प्रोडक्ट्स डाइट में जरूर शामिल करें। जंक या फास्ट फूड कभी-कभार तो ठीक है, पर हमेशा नहीं। घर पर ही बदल-बदल कर उसे कुछ-न-कुछ खाने के लिए दें, वह बाहर खाने की जिद्द नहीं करेगा। अगर हो सके तो उसे अपने साथ किचन में ले जाएं और उसके साथ बातें करते-करते उसकी मनपसंद डिश बनाएं। इस दौरान उसे भी कुकिंग में शामिल कर लें।

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द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : प्रार्थना से भी दूर होता है तनाव

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तनाव से निपटने के लिए आप क्या-क्या नहीं करते। व्यायाम से लेकर डॉक्टररी सलाह तक। लेकिन, इन सबके अलावा भी एक अन्य उपाय है। जो आसान होने के साथ-साथ बेहद कारगर भी है और वो है प्रार्थना। 

आपने कभी तनाव करने के लिए प्रार्थना का सहारा लिया है। जी, प्रार्थना से न सिर्फ तनाव का स्तर कम होता है, बल्कि यह कई बीमारियों से बचाने में भी मददगार साबित होती है।   एक नए शोध के मुताबिक प्रार्थना मन के साथ-साथ शरीर को भी स्वस्था रखती है। साथ ही इससे उम्र में भी इजाफा होता है। यही नहीं प्रार्थना करने से ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में हुए इस शोध में पाया गया कि धार्मिक प्रवृत्ति के लोगों में कई तरह की बीमारियां होने की आशंका भी कम होती है।

जीवनशैली पर पूजा का प्रभाव

नियमित रुप से पूजा और प्रार्थना करने से मन में सकारात्क  ऊर्जा बढ़ती है। और प्रार्थन करने वाला व्यक्ति भीतर से अच्‍छा और बेहतर महससू करता है। इससे जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है। आजकल अनियमित जीवनशैली कई रोगों की मुख्य वजह है। जब आप पूजा व प्रार्थना को अपने जीवन में एक आदत के तौर पर शामिल करते हैं तो निश्चित ही आप अपने अंदर अच्छा बदलाव महसूस करेंगे।

 

विशेषज्ञों की मानें तो पूजा और संगीत व्यक्ति में बढ़ रहे दबाव का स्तर कम करते हैं। इसका मतलब है ये गतिविधियां जीवन में संतुलन बनाये रखती हैं। प्रार्थना का सकारात्मक प्रभाव देखने के लिये जरूरी है कि उसे दिल से किया जाए। नियमित योग करने वाले लोग जो हमेशा फिट रहते हैं वह भी एक किस्म की पूजा प्रार्थना ही कर रहे होते हैं।

नोएटिक थैरेपी क्या है

नोएटिक (मंत्रों, संगीत, स्पर्श और प्रार्थना) थैरेपी वह थैरेपी होती है जिसमें बिना दवाई, उपकरण और सर्जरी के इलाज किया जाता है। कई मरीजों पर नोएटिक थैरेपी का इस्तेमाल करने से पाया गया है कि वह,जो सिर्फ दवाई लेते हैं, उनके मुकाबले इनके 30 प्रतिशत ज्यादा सही होने की संभावना होती है साथ ही इन लोगों में एक आश्वासन इस बात का भी होता है कि ये मरीज लंबे समय तक बीमार नहीं पड़ते।

 

प्रार्थना के अन्य लाभ

प्रार्थना करने से मन स्थिर और शांत रहता है। क्रोध पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।इससे स्मरण शक्ति और चेहरे की चमक बढ़ती है।प्रार्थना से मन में सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है, जिससे मन निरोगी बनता है।शोध में पाया गया है नियमित तौर पर ईश्वर का ध्यान करने और प्रार्थना करने से रक्त संचार दुरुस्त रहता है।सामूहिक तौर पर प्रार्थना करने से व्यक्ति के मन में एकता का भाव बढ़ता है और अकेलापन दूर होता है।धार्मिक स्थल तक पैदल चल कर जाने से व्यायाम भी हो जाता है।

प्रतिदिन प्रार्थना करने से व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है, जिससे एकाग्रता आती है।

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द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : मीलों दूर से कैसे लौट आते हैं कबूतर?

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राजा-महाराजाओं के जमाने में कबूतरों को एक कुशल संदेशवाहक की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा। कहा जाता है कि कबूतर अपना रास्ता कभी नहीं भूलते लेकिन सवाल है कि वे ऐसा कैसे कर पाते हैं? 
 
यूनिवर्सिटी ऑफ पीसा के वैज्ञानिकों का कहना है कि कबूतरों की इस चतुराई के पीछे उनकी सूंघने की क्षमता का सबसे बड़ा हाथ होता है। वे किसी भी क्षेत्र की हवाओं की खुशबू को पहचान कर कहीं से भी बिना रास्ता भटके अपने बसेरे तक वापस लौट आते हैं। हवाओं को पहचानने की क्षमता के कारण वे अलग-अलग हवाओं की गंध से हवाओं के रुख को निर्धारित कर लेते हैं और इसी शक्ति के कारण वे उन क्षेत्रों के वातावरण की गंध से अपने दिमाग में एक नक्शा बना लेते हैं। 

इस स्मरण शक्ति के लिए कबूतर के जीवन के प्रथम तीन महीने बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। अगर इन तीन महीनों में कबूतर को आजाद हवाओं में न उडऩे दिया जाए तो वे जीवन भर अपनी यह अद्भुत शक्ति प्राप्त नहीं कर सकते। 

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द ट्रस टाइम्स – Online News Portal : सहारा कंपनियों ने की सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना: सेबी

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 भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि सहारा समूह की दो रियल एस्टेट कंपनियों ने निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने के तीन अदालती आदेशों की अवहेलना की।

सेबी ने कहा कि इन कंपनियों के प्रमोटर रहते हुए सुब्रत राय अवहेलना करने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते हैं। सेबी के वरिष्ठ वकील अरविंद दत्तार ने न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर की पीठ से कहा, अदालत के तीन आदेशों की सोच समझ कर लगातार अवहेलना की गई। उन्होंने कहा कि राय यह कह कर बच नहीं सकते हैं कि वह सिर्फ एक शेयरधारक हैं।

दत्तार ने अदालत से कहा कि सहारा समूह की दो कंपनियों-सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्प और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कॉर्प-ने अदालत के 31 अगस्त 2012, पांच दिसंबर 2012 और 25 फरवरी के आदेश की अवहेलना की। इन आदेशों में कंपनियों को 24 हजार करोड़ रुपये सेबी के पास जमा करने के लिए कहा गया था, ताकि वह निवेशकों को इसे वापस कर सके। अदालत दो सहारा रियल एस्टेट कंपनियों, राय सहित उनके निदेशकों,  के विरुद्ध अदालत के पालन नहीं करने के लिए सेबी द्वारा दाखिल की गई अवमानना याचिका की सुनवाई कर रही है।

अदालत ने 31 अगस्त 2012 को सहारा समूह की दो कंपनियों को 15 फीसदी सालाना ब्याज के साथ निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया था। पांच दिसंबर को आदेश को संशोधित करते हुए अदालत ने सेबी को 5,120 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आदेश दिया, जिसे उसने पहले सहारा की कंपनियों से लेने से इंकार कर दिया था। 

न्यायाधीश ने सहारा को अगले साल जनवरी के पहले सप्ताह में 10 हजार रुपये जमा करने और शेष राशि फरवरी में जमा करने का आदेश दिया था। 25 फरवरी को अदालत ने सहारा की कंपनियों के अधिक समय देने की मांग को खारिज कर दिया था। सेक्योरिटीज अपीलीय न्यायाधिकरण ने 18 अक्टूबर 2011 को सहारा की देानों कंपनियों को निवेशकों के पैसे वापस करने का आदेश दिया था।

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